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गर्म जल के कुंड.


भीमबांध से अब नई उम्मीद – ईको टूरिज्म, जैविक खेती और बारूद का खजाना !

@news5pm

February 4th, 2018

निशु जी लोचन /

बिहार में 2000 वर्ग किलोमीटर में फैला एक वैसा इलाका है जहां बारूद का खजाना है. 1970 के दशक से ही ईको टूरिज्म के लिए मशहूर है. नेचुरल सल्फर की प्रचुरता के कारण कृषि उत्पाद भी बेजोड़ और पौष्टिक हो रहा है. लेकिन माओवाद के चपेट में आने से नई उम्मीद पर पानी फिर गया था. लेकिन एक बार फिर से केंद्र सरकार और बिहार सरकार की पहल पर नई उम्मीद जागी है. आइये चले  हम बारूद के पहाड़ पर जो मुंगेर में हवेली खड़गपुर इलाके के भीमबांध में है.

रमणीक भीम बांध का अन्दर भाग .

इलाके में जाने के समय खड़गपुर के एसडीओ संजीव कुमार भी साथ हो गए थे.   मीडिया टीम जंगली रास्ते और पहाड़ों के बीच होते हुए उस जगह की तलाश में थी जहां बारूद का पहाड़ है. रास्ते मे हर जगह सीआरपीएफ के जवान तैनात दिखे. चुकी खड़गपुर के अधिकारी भी साथ थे जिन्हें बारूद का पहाड़ देखना था. बारूद के पहाड़ पर जाने के पहले कलवल करती गर्म जल की धारा मिली जो, पहाड़ी नदी के रूप में बह रही थी. साथ चल रहे खड़गपुर के

गुफाओ से गर्म जल का स्रोत .

डीसीएलआर सह जियो केमेस्ट्री के एक्सपर्ट कुमार धनंजय ने बताया कि गर्म जल का स्रोत वही बारूद का पहाड़ है.  उसमें सल्फर जैसे मिनिरल का कंटेंट ज्यादा है। चुकी जमीन के नीचे टेक्टोनिक प्लेट के अंदर से मॉइस्चर हमेशा निकलता रहता है जो ऊपर के लेयर में आने से हॉट वाटर में कन्वर्ट हो रहा है. और उसमें सल्फर की उपलब्धता ज्यादा है. मीडिया  की टीम बारूद के पहाड़ की तलहटी में पहुंची जहां न सिर्फ सल्फर जैसा लाल मिट्टी मिला बल्कि , गर्म जल का बड़ा सा तालाब भी दिखा. अधिकारी बताते हैं कि भीमबांध से सीता कुंड तक तकरीबन 125 हॉट वाटर स्प्रिंग पॉइंट है.  लेकिन ताज़ा हालात है कि बारूद के पहाड़ की तलहटी से अवैध रूप से सल्फर की खुदाई भी हो रही है. सवाल यही है कि अगर सल्फर का इस्तेमाल गन पाउडर और बारूद में होता है तो वहां से चोरी छुपे कौन ले जा रहा है बारूद के कच्चे माल को ? खड़गपुर के एसडीओ संजीव कुमार कहते हैं कि आज मेरी जानकारी में बातें आई हैं. वरीय अधिकारी की सूचित कर आगे की करवाई शुरू की जाएगी.

चुकी 5 जनवरी 2005 को मुंगेर के एसपी के सी सुरेंद्र बाबू की हत्या इसी भीमबांध जंगल में नक्सलियों ने किया था. तब से 2012 तक लगातार इलाका डिस्टर्ब रहा. लेकिन जब 2013 से लगातार सीआरपीएफ कैम्पिंग होना शुरू हुआ तो ईको सेंसेटिव ज़ोन में एक बार फिर से टूरिस्ट की आवाजाही बढ़ गयी है. पिछले एक जनवरी को तकरीबन 5 हज़ार गाड़ियों के साथ पर्यटकों का आगमन हुआ था. सीआरपीएफ के कामांडेन्ट नीलकमल रॉय कहते हैं कि सुरक्षा का भरोसा मिला है इसलिए पर्यटक आने लगे हैं.

गर्म जल के झील.

अब यहां तीन संभावनाएं झलक रही हैं. एक तो सल्फर की प्रचुरता वाली पहाड़ी से बारूद के कच्चे माल का उपलब्ध होना दूसरी भीम बांध से हवेली खड़गपुर के झील तक कि 35 किलोमीटर इलाके की मिट्टी में सल्फर की प्रचुरता के कारण पौष्टिक उत्पाद का उपजना और तीसरी ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलना. बिहार कृषि विश्वविद्यालय  के एक साइंटिस्ट, रामदत्त के अनुसार भीम बांध में पाए जानेवाले गर्म जल में चुकी सल्फर के साथ साथ अन्य मिनरल प्रचुर मात्रा में पाये जाते है, यह जैबिक खेती के लिए काफी उपयुक्त है पर कृषि भूमि अम्लियो नहीं होना चाहिए जहाँ यह पानी का इस्तेमाल हो. यहाँ के पानी जमीन के अम्लियो मात्रा को बढ़ा देता है.

एस डी ओ , संजीव कुमार भीम बांध में ग्रामीणों के बीच .

खैर, गाहे वगाहे पर्यटकों की किलकारी और खुशनुमा चहलकदमी भी दिख रहा है, जो भीम बांध के लिए फिर से कुछ नया है.  इलाके के लोक कलाकार भी गुनगुनाने लगे हैं “…. पलकन डगर बुहारूँगा, तेरी राह निहारूँगा…”


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